कलम चल पड़ी उसका ख्याल आने से…
July 26th, 2011
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तन्हाई जब मुकद्दर में लिखी थी
तो क्या शिकायत अपने बेगानों से
हम मिट गए जिनकी चाहत में
वो बाज नहीं आते हमें आजमाने से,
हम तो दुनिया छोड़ दे उनकी खातिर
पर वो इंकार कर गए हमें अपनाने से
अगर मिले खुदा तो मांग लूँ दुआ उससे
मोहब्बत ही मिटा दे ज़माने से,
जिंदा लाश कभी दर्द महशुस नहीं करती
चलती थी साँस कभी उसके आने से
मैंने कभी लिखा नहीं था शौक से
बस कलम चल पड़ी उसका ख्याल आने से…